विलक्षण ग्रन्थ

 श्रीगुरु ग्रंथ साहिब का

प्रकाश वर्ष (१२ सितम्बर)

विलक्षण ग्रन्थ


       @मानव

श्रीगुरु ग्रंथ साहिब के सम्मुख

नतमस्तक होने का अर्थ है

भारतीय अध्यात्म,दर्शन 

व नैतिक मूल्यों के प्रति 

आस्था रखना।


श्रीगुरु ग्रंथ साहिब 

मध्यकालीन भारतीय संस्कृति का

विलक्षण ग्रंथ है;

जिसका मूल भाव

मानव कल्याण है,

जिसमें छत्तीस वाणीकारों की

वाणी संकलित हैं।


आठ शताब्दियों का 

भारतीय चिंतन,दर्शन 

और अध्यात्म भी इसमें समाहित है;

अध्यात्म के मौलिक सिद्धांत

इसमें सहज ही प्राप्त हो जाते हैं।


यहाँ भारतीय अध्यात्म के 

महापुरुषों की वाणियों को

निर्गुण काव्य की

केंद्रीय संवेदना के साथ भी

नए अध्यात्मवाद के साथ 

देखा जा सकता है।


गुरमत दर्शन' के

मौलिक चिंतन के माध्यम से

श्रीगुरु ग्रंथ साहिब में

ये वाणीकार निराकार की भक्ति,प्रेम

एवं उनकी अनुभूतियों को 

सरल व व्यावहारिक रूप में

जनहित के साथ

त्याग,सेवा,भाईचारा,समता

और सामाजिक चिंतन के 

कल्याण मार्ग को

सशक्त अभिव्यक्ति

प्रदान करते हैं।


श्रीगुरु ग्रंथ साहिब में 

भारतीय संगीत की 

दार्शनिक व्याख्या भी मिलती है;

शास्त्रीय संगीत की पद्धतियाँ

एवं उत्तर भारत में प्रचलित

कई लोक धुनों का सामंजस्य भी 

आध्यात्मिक वाणी को 

सर्वोच्च बनाता है।


श्रीगुरु ग्रंथ साहिब ने जो दिशा

मानवता के लिए प्रदान की,

उसका संदर्भ युगों-युगों तक

पूजित रहेगा।


(आलोक-

वर्ष 1604 में पाँचवें गुरु श्रीअर्जुन देव जी ने

अमृतसर में इसका संपादन किया।

सिख मनीषी

भारतीय भाषाओं के मर्मज्ञ

भाई गुरदास की भूमिका भी

संपादन में उल्लेखनीय है। 

इसका प्रथम प्रकाश

श्रीहरिमंदिर साहिब में हुआ।)


   ✍️मनोज श्रीवास्तव

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