तर्पण

 श्राद्घ पर्व पर,

तर्पण


                 @मानव

तर्पण

केवल कर्मकांड नहीं,

कृतज्ञता का संस्कार है।


श्राद्ध-तर्पण का वास्तविक उद्देश्य

केवल दिवंगत पितरों का 

स्मरण करना भर नहीं, 

बल्कि उनके प्रति अपने दायित्व

और कृतज्ञता को व्यवहार में

व्यक्त करना भी है। 


जिन पूर्वजों के कारण

हमें जीवन,सँस्कार

और परिवार की परंपरा मिली,

यह उनके योगदान को 

श्रद्धापूर्वक याद करना है। 


तर्पण

केवल कर्मकांड नहीं,

आत्मीय कृतज्ञता का सँस्कार है।


यदि माता-पिता

एवं परिवार के बुजुर्ग जीवित हैं

तो उनकी देखभाल,

सम्मान,

समय देना

और आवश्यकताओं का

ध्यान रखना भी 

श्राद्ध-तर्पण का

सबसे प्रत्यक्ष रूप है। 


जरूरतमंदों की सहायता करना,

परिवार में प्रेम बनाए रखना

और समाज के हित में 

कार्य करना भी

एक प्रकार का

पूर्वजों को तर्पण है।


तर्पण जीवन जीने की 

एक सँस्कारपरक दृष्टि है,

जिसमें पूर्वजों को याद करना 

उसका आरंभ है।


उनके श्रेष्ठ सँस्कारों को अपनाना

उसका विस्तार है

और आने वाली पीढ़ी को 

वही श्रेष्ठ परंपराएं सौंपना 

उसका वास्तविक फल है।


✍️मनोज श्रीवास्तव

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