नौ दुर्गा

 नवरात्र पर,

नौ दुर्गा


          @मानव

नवरात्रि

आत्म शुद्धि का समय है;

प्रकृति अपने आप में

देवी का स्वरूप है।


नवरात्र के पावन अवसर पर

पूजित नौ देवियाँ

धार्मिक प्रतिमाएँ मात्र नहीं 

अपितु आधुनिक प्रतीक भी हैं;

प्रत्येक देवी

एक मानवीय मूल्य

और सामाजिक आदर्श का 

प्रतीक है।


पर्वतपुत्री शैलपुत्री

धरती और प्रकृति से

जुड़ाव की प्रेरणा देती हैं;

यह देवी हमें बताती हैं

कि हमें प्रकृति का सम्मान करके

टिकाऊ जीवन शैली 

अपनानी चाहिए।


देवी ब्रह्मचारिणी तपस्या 

और अनुशासन की प्रतीक हैं,

जो सँदेश देती हैं कि

शिक्षा, आत्मसंयम

और स्पष्ट जीवन-दृष्टि से ही 

प्रगति संभव है। 


चंद्रघण्टा साहस

और वीरता की देवी हैं,

जो सिखाती हैं कि समाज में 

अन्याय,अपराध

और शोषण के खिलाफ 

निडर होकर खड़ा होना होगा।


सृष्टि की रचयिता कुष्माण्डा 

आधुनिक युग में रचनात्मकता,

नवाचार

और सकारात्मक ऊर्जा का 

प्रतीक हैं।


स्कंदमाता मातृत्व

और पालन-पोषण की प्रतीक हैं,

जो हमें याद दिलाती हैं

कि अगली पीढ़ी को

अच्छे सँस्कार देना

हमारा कर्त्तव्य है। 


कात्यायनी

दमन और अन्याय के

अंत की प्रतीक हैं,

जो महिला सशक्तिकरण 

और न्यायपूर्ण समाज के लिए

सँघर्ष की प्रेरणा देती हैं। 


कालरात्रि-

अँधकार का नाश करने वाली

देवी कालरात्रि

हमें अज्ञान,अँधविश्वास

और कुरीतियों के विरुद्ध 

जागरूकता फैलाने का

सँदेश देती हैं।


माँ महागौरी पवित्रता

और शाँति की प्रतीक हैं, 

और समाज में स्वच्छता, 

समानता

और मानसिक शाँति का 

आदर्श प्रस्तुत करती हैं। 


सिद्धिदात्री ज्ञान,उपलब्धि 

और परिपूर्णता की

प्रतीक देवी हैं,

जो प्रेरित करती हैं

कि हम कौशल और ज्ञान से 

आत्मनिर्भर और समर्थ बनें। 


नवरात्र की नौ देवियाँ

हमें आत्म सुधार

और समाज सुधार की

पूरी रूपरेखा प्रदान करती है।


 ✒️मनोज श्रीवास्तव

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