विजयोत्सव

 दशहरा पर,

विजयोत्सव


            @मानव

उत्सवधर्मी भारत में

हर दिन नई प्रेरणा

एवं संदेश का वाहक है, 

जो अंतर्मन को

सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।


इनसे प्रवाहित होने वाली

प्यार,एकता व सद्भाव की भावनाएं

विविधताओं से भरे इस देश को

एकता के सूत्र में

बाँधे रखती हैं।


अधर्म और उसके परिणाम से

दुनिया को अवगत कराना 

तथा समाज में नारी सम्मान को

प्रतिष्ठापित करना

इसका उद्देश्य है।


रामलीलाओं के आयोजन 

नारी स्वाभिमान को 

कलंकित करने वाले 

रावण दहन के साथ संपन्न होते हैं।


माँ सीता ही नहीं,

अहिल्या जैसी शिला बन चुकी

नारियों का उद्धार

नारी सम्मान् का उत्कृष्ट उदाहरण है।


भगवान श्रीराम की विजय गाथा

सबके लिए आदर्श हैं,

वन में अस्थिसमूह देखकर

वे मानवता के लिए 

अभिशाप बन चुके 

राक्षसों का वध कर 

अरण्य सँस्कृति की रक्षा करते हैं।


उनके द्वारा रावण का सँहार

अपने साम्राज्य की

अभिवृद्धि के लिए नहीं, 

धर्म की रक्षा के लिए था। 

विभीषण का राजतिलक 

विजय की उदात्त परिभाषा को

व्याख्यायित करता है।


अतः विजय किसी व्यक्ति 

या राष्ट्र की नहीं,

पूरी मानवता की होती है। 

विजयोत्सव की यही अवधारणा

आज वैश्विक संकल्प बने।


 ✒️मनोज श्रीवास्तव

Comments

Popular posts from this blog

नवरात्र साधना का सँदेश

आन्तरिक चेतना रँगते रङ्ग

युग चेतना का पर्व