सुखी दाम्पत्य का आधार

 करवा चौथ पर,

सुखी दाम्पत्य का आधार


            @मानव

सभी  देवशक्तियाँ

हमारे हदयों को एक करें। 

जैसे जल आपस में

मिल जाता है,

वैसे ही पति-पत्नी के मन 

और भावनाएं भी 

एक-दूसरे से जुड़ी रहें। 


समंजन्तु विश्वे देवाः

समापो हृदयानि नौ।

सं मातरिश्वा सं धाता

समु देष्ट्री दधातु नौ।।

    (ऋग्वेद)


सुखी दाम्पत्य जीवन का आधार

केवल रीति-रिवाज नहीं, 

बल्कि प्रेम,विश्वास

और आपसी समझ है;

इसी वैदिक भावना से जुड़ा है

करवा चौथ का पर्व।


पति-पत्नी के मन

और भावनाओं को जोड़ने की 

जो कामना ऋग्वेद में की गई है, 

उसी की पूर्ति में

सहयोगी बनता है

करवा चौथ का पर्व!


करवा चौथ

एक दिन का उपवास नहीं,

बल्कि जीवनभर

प्रेम,विश्वास और समर्पण 

निभाने का सँकल्प है।


करवा चौथ का महत्व 

अपने मन और व्यवहार को

अच्छा बनाने में है;

व्रत हमें सँयम,धैर्य

और दूसरों की भावनाओं का

सम्मान करना सिखाता है। 


जब पति-पत्नी के बीच 

विश्वास की मजबूती, 

व्यवहार में मिठास,

मन में अपनापन

और हर परिस्थिति में 

एक-दूसरे का साथ देने की

भावना होती है,

तभी परिवार सुखी

और सँस्कारवान बनता है।


शीतलता और शाँति का

प्रतीक चन्द्रमा

भारतीय परंपरा में

हमारे स्वभाव में भी शाँति,

वाणी में मिठास

और व्यवहार में प्रेम का

सँचार करता है।


प्रेम और त्याग

जीवन का महत्त्वपूर्ण आधार है;

सच्चा प्रेम दूसरों की

प्रसन्नता और भलाई के लिए

त्याग करने में है।


पति-पत्नी का सँबंध

तभी मजबूत होता है,

जब दोनों एक-दूसरे की 

भावनाओं को समझें, 

सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ दें

और आपसी सम्मान बनाए रखें।


जहाँ स्वार्थ की जगह सहयोग

और अहंकार की जगह 

अपनापन है,

वहाँ परिवार में सुख-शाँति

बनी रहती है।


परिवार को सुखी

बनाने का दायित्व 

पति-पत्नी दोनों का है;

दोनों को एक-दूसरे के स्वास्थ्य,

भावनाओं,सम्मान

और सपनों का ध्यान रखना होगा।


 ✍️मनोज श्रीवास्तव

Comments

Popular posts from this blog

नवरात्र साधना का सँदेश

आन्तरिक चेतना रँगते रङ्ग

युग चेतना का पर्व