विक्रम की विजय ध्वजा
विक्रम की विजय ध्वजा @मानव चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत् के आरंभ होने का दिन है, विश्व के सबसे पहले गणतंत्र का स्थापना दिवस होने के साथ-साथ सृष्टि के आरंभ का भी दिन है। अब से 2082 वर्ष पहले शकों को परास्त कर मालव गणराज्य की जो अविस्मरणीय जीत हुई, उसे राष्ट्रीय गौरव का विषय मानकर घर-घर, द्वार-द्वार गुड़ी बाँधने की परंपरा के कारण यह गुड़ी पड़वा का भी दिन है। गुड़ी विजयोल्लास की देवी है, नए सँवत्सर की शुभ-संदेशवाहिका है; यह नव-संवत्सर की सनातन उषा ही है जो हमारे द्वार पर उत्सव बनकर आ खड़ी होती है। विक्रम सँवत् सूर्य-गति पर नहीं, चंद्रमा की कलाओं पर निर्भर है; कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के एक-एक दिन के कलात्मक सौंदर्य के जादू से हम सब परिचित हैं। विक्रम सँवत् के अनुशासन से बंधे हैं हमारे आचार-विचार! इसके मास,पक्ष और तिथियों का अधूरा ज्ञान होने के बावजूद नई और पुरानी पीढ़ी विक्रम संवत् के साथ दिल से जुड़ी हैं, क्योंकि हमारे धार्मिक रीति-रिवाज, जन्म-विवाह-मृत्यु से संबंधित सामाजिक व्यवहार,पर्व...