अनुभूति छठ की!
छठ पर, अनुभूति छठ की! @मानव कार्तिक मास पवित्रतम मास है; कार्तिक शुरू होते ही हवाओं में हल्की-सी ठण्ड का आभास और तन-मन में उस ठण्ड को समेटने की ललक बढ़ जाए तो समझिए कि छठ आ गया। घास पर ओस की बूँद की चमक, ऐसे वातावरण में दूर कहीं जब छठ का कोई गीत सुनाई दे जिसे सुनते ही रोम-रोम घर पहुँचने को मचलने लगे तो समझिए कि छठ आ गया। केले की गहर गदराने लगे, अमरूद,शरीफा डाल पर इतराने लगे, समझिए कि छठ आ गया। छत पर बैठकर गेहूँ सूखने की प्रतीक्षा होने लगे और बाजार में रास्ते के दोनों तरफ सुपली,दउरा, फलों के मनोहारी दृश्य दिखने लगें, तो समझिए कि छठ आ गया। रेलवे स्टेशन पर घर पहुँचने को बेचैन खड़ी-बैठी कतारें और सब राहें घर की ओर मुड़ने लगें तो समझिए कि छठ आ गया। छठी मैया से घर दुवार परिवार की कुशलता की निर्मल कामना को अपने अँचरा में बांध कर जब घर की मातृ शक्ति छठ पर्व की तैयारी में जुटती है तो लगता है साक्षात् भवानी ही निर्जला उपवास में बैठकर चारों दिन अनुष्ठान कर रही हों, गुड़ की ...