स्वर्ण संस्कृति
अक्षय तृतीया पर स्वर्ण संस्कृति @मानव भारतीय संस्कृति में स्वर्ण केवल बहुमूल्य धातु नहीं बल्कि धर्म,परंपरा और पारस्परिक प्रेम को परिभाषित करने वाला तत्व है। सोना कोई आम धातु नहीं, भारतीय लोकमानस के अंतर्मन में इसकी मंगल उपस्थिति है; इसका दान व संग्रहण दोनों ही एक आम भारतीय परिवार की जीवनशैली और विचार में व्याप्त है। इसकी पवित्रता और शुद्धता का ही महत्व है कि इष्ट प्रभु के विग्रह स्वरूप को हम स्वर्ण आभूषण-अलंकरण से सुसज्जित देखते हैं। वेदों में 'हिरण्य' हमें धन,समृद्धि और दिव्यता से जोड़ता है; ऋग्वेद में देवताओं के वस्त्र,कवचऔर आभूषण स्वर्ण जड़ित वर्णित हैं। सनातन सँस्कृति में सोने की पूजा की जाती है; मंदिरों में भेंट चढ़ाया जाता हैं; पंडित को दान दिया जाता है; इस श्रद्धा भाव के कारण कमर के नीचे अधारणीय भी है। हमारी संस्कृति में स्वर्ण के प्रति पूज्य भाव है स्वर्ण सुसज्जित स्त्री लक्ष्मी का स्वरूप है; स्त्री का स्वर्ण उसका अपना 'स्त्री धन' है। कैसी भी हैसियत...