राष्ट्रीय एकता वाहक शिव
राष्ट्रीय एकता वाहक शिव @मानव जिसमें सारा जगत शयन करता है, जो विकार रहित है, वह शिव हैं; जो अमंगल का ह्रास करते हैं, वे ही सुखमय, मंगलमय शिव हैं। जो सारे जगत को अपने अंदर लीन कर लेते हैं, वे ही करुणासागर भगवान शिव हैं; जो नित्य,सत्य,जगत आधार, विकार रहित, साक्षीस्वरूप हैं, वे ही शिव हैं। धर्मग्रंथों में भगवान शिव को 'कालों का काल' और 'देवों का देव' अर्थात् 'महादेव' कहा गया है। एक होते हुए भी शिव के नटराज, पशुपति, हरिहर, त्रिमूर्ति, मृत्युंजय, अर्द्धनारीश्वर, महाकाल, भोलेनाथ, विश्वनाथ, ओंकार, शिवलिंग, बटुक, क्षेत्रपाल, शरभ इत्यादि अनेक रूप हैं। महासमुद्र रूपी शिव ही एक अखण्ड परम तत्व हैं, इन्हीं की अनेक विभूतियाँ अनेक नामों से पूजी जाती हैं, यही सर्वव्यापक और सर्वशक्तिमान हैं। यही व्यक्त-अव्यक्त रूप से 'सगुण ईश्वर' और 'निर्गुण ब्रह्म' कहे जाते हैं तथा यही परमात्मा, जगत आत्मा, शम्भव, मयोभव, शंकर, मयस्कर, शिव, रूद्र आदि कई नामों से संबोधित किए जाते हैं। शिव के मस्तक पर अर्द्धचंद्र शोभायमान है,...